भोजन केवल पेट भरने के लिए नहीं है, यह हमारे शरीर को पोषण और दिनभर काम करने की ताकत देता है। भारतीय रसोई में मौजूद सादा खाना अपने आप में पूर्ण है, बस ज़रूरत है तो थोड़ी सी जागरूकता की।
अक्सर लंबी मीटिंग्स या डेडलाइन्स के कारण हम लंच का समय टाल देते हैं या कैंटीन से कुछ भारी मंगा लेते हैं। इसका असर दोपहर बाद की सुस्ती में दिखता है। अपनी टिफिन में साधारण रोटी, दाल, चावल और कोई मौसमी सब्ज़ी ले जाना सबसे सुरक्षित और ऊर्जावान विकल्प है।
खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं। लैपटॉप की स्क्रीन देखते हुए खाने से हम अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं और शरीर भारी महसूस करता है।
भारत में चाय का ब्रेक केवल एक पेय नहीं, बल्कि सहकर्मियों के साथ बातचीत का ज़रिया है। लेकिन बार-बार चाय के साथ अत्यधिक मीठे बिस्किट या तले हुए स्नैक्स दिनचर्या का संतुलन बिगाड़ सकते हैं।
इसकी जगह कभी-कभार भुने हुए चने, मखाने, या कुछ ताज़े फल अपनी डेस्क पर रखें। ये छोटे बदलाव आपको शाम तक तरोताज़ा रखते हैं।